UP Board Class 10 Social Science Paper 4 – प्रश्नपत्र उत्तर सहित (2026)
यह पोस्ट UP Board Class 10 Social Science Paper–4 (2026) के लिए बहुविकल्पीय प्रश्न, वर्णनात्मक प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर) तथा मानचित्र सम्बन्धी प्रश्नों की सम्पूर्ण तैयारी प्रस्तुत करती है।
(a) ज्यूसेपे गैरीबाल्डी
(b) ओटो वॉन बिस्मार्क
(c) नेपोलियन
(d) विलियम प्रथम
(a) 1981
(b) 1991
(c) 1971
(d) 2001
(a) 1872
(b) 1875
(c) 1878
(d) 1880
(a) 1848
(b) 1815
(c) 1834
(d) 1900
(a) महात्मा गांधी
(b) सरदार पटेल
(c) सुभाषचन्द्र बोस
(d) बाल गंगाधर तिलक
(a) 1919
(b) 1924
(c) 1929
(d) 1934
(a) इटली
(b) इंग्लैण्ड
(c) रूस
(d) जर्मनी
(a) बैंकों द्वारा
(b) सदस्यों द्वारा
(c) गैर-सरकारी संस्था द्वारा
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(a) कांशीराम
(b) मायावती
(c) शाहू जी महाराज
(d) मुलायम सिंह यादव
(a) मछुआरा
(b) शिक्षक
(c) डाकिया
(d) व्यापारी
1.(i) यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय के कारण
यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय के पीछे अनेक राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक कारण थे। फ्रांसीसी क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व के विचारों को जन्म दिया, जिससे लोगों में राष्ट्रीय चेतना विकसित हुई। नेपोलियन के सुधारों ने सामंती व्यवस्था को कमजोर किया और समान कानून व्यवस्था स्थापित की। औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप मध्यम वर्ग का उदय हुआ, जिसने राष्ट्रीय एकता और लोकतान्त्रिक शासन की माँग की। साझी भाषा, संस्कृति और इतिहास ने लोगों को एक राष्ट्र के रूप में सोचने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त निरंकुश शासन और विदेशी नियंत्रण के विरोध ने भी यूरोप में राष्ट्रवादी आंदोलनों को बल प्रदान किया। इस प्रकार इन सभी कारणों के सम्मिलित प्रभाव से यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय हुआ।
1.(ii) साइमन कमीशन के मुख्य उद्देश्य
साइमन कमीशन का गठन 1927 में ब्रिटिश सरकार द्वारा किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में संवैधानिक सुधारों की समीक्षा करना था। कमीशन यह जाँच करना चाहता था कि 1919 के अधिनियम भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप कितने सफल रहे हैं। इसके अतिरिक्त भविष्य की शासन व्यवस्था के लिए सुझाव देना भी इसका उद्देश्य था। हालाँकि इसमें किसी भी भारतीय सदस्य को शामिल नहीं किया गया, जिसके कारण पूरे भारत में इसका विरोध हुआ। “साइमन वापस जाओ” के नारे लगे और यह आंदोलन राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया। इस प्रकार साइमन कमीशन के उद्देश्य भले ही प्रशासनिक थे, परन्तु इसके परिणामस्वरूप भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और अधिक मजबूत हुआ।
2.(i) उत्तरदायी शासन का अर्थ
उत्तरदायी शासन वह शासन व्यवस्था है जिसमें सरकार अपने कार्यों और निर्णयों के लिए जनता के प्रति जवाबदेह होती है। लोकतान्त्रिक प्रणाली में सरकार जनता द्वारा चुनी जाती है, इसलिए उसे जनहित को ध्यान में रखकर कार्य करना पड़ता है। सरकार को संसद, विधानसभाओं और जनता के प्रश्नों का उत्तर देना होता है। यदि सरकार अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन नहीं करती, तो जनता चुनावों के माध्यम से उसे हटा सकती है। उत्तरदायी शासन पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसहभागिता को बढ़ावा देता है। इससे प्रशासन अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनता है।
2.(ii) राजनीतिक दलों के चार कार्य
राजनीतिक दल लोकतन्त्र की रीढ़ होते हैं। इनका पहला कार्य चुनाव लड़ना और उम्मीदवार खड़े करना है। दूसरा कार्य विभिन्न नीतियाँ और कार्यक्रम तैयार करना तथा उन्हें जनता के सामने प्रस्तुत करना है। तीसरा कार्य चुनाव जीतने के बाद सरकार का गठन करना और शासन संचालन में भाग लेना है। चौथा कार्य जनता और सरकार के बीच कड़ी का कार्य करना है, जिससे जनता की समस्याएँ सरकार तक पहुँच सकें। इस प्रकार राजनीतिक दल लोकतान्त्रिक व्यवस्था को प्रभावी बनाते हैं।
3.(i) जैव-विविधता का अर्थ एवं महत्व
पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी प्रकार के जीव-जंतु, पौधे और सूक्ष्मजीवों की विविधता को जैव-विविधता कहते हैं। यह मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इससे भोजन, औषधि और कच्चा माल प्राप्त होता है। जैव-विविधता पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक है। वन, नदियाँ और समुद्री पारितंत्र मानव जीवन को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। यदि जैव-विविधता नष्ट होती है, तो पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो जाता है। अतः जैव-विविधता का संरक्षण मानव अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।
3.(ii) जल दुर्लभता और उसके कारण
जल दुर्लभता का अर्थ है उपलब्ध जल संसाधनों की कमी। आज यह एक गंभीर वैश्विक समस्या बन चुकी है। इसके प्रमुख कारणों में तीव्र जनसंख्या वृद्धि, औद्योगीकरण और शहरीकरण शामिल हैं। कृषि में जल का अत्यधिक उपयोग और जल संसाधनों का अपव्यय भी इसके लिए जिम्मेदार है। इसके अतिरिक्त वर्षा की अनियमितता और जल प्रदूषण ने समस्या को और बढ़ा दिया है। जल संरक्षण और उचित प्रबंधन द्वारा जल दुर्लभता की समस्या को कम किया जा सकता है।
4.(i) वैश्वीकरण में प्रौद्योगिकी की भूमिका
प्रौद्योगिकी ने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को तीव्र गति प्रदान की है। आधुनिक संचार साधनों जैसे इंटरनेट, मोबाइल और उपग्रह संचार ने विश्व को एक वैश्विक गाँव में बदल दिया है। तेज परिवहन साधनों ने वस्तुओं और सेवाओं के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सरल बनाया है। सूचना प्रौद्योगिकी के विकास से बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विभिन्न देशों में कार्य करने लगी हैं। इस प्रकार प्रौद्योगिकी ने वैश्वीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
4.(ii) औपचारिक एवं अनौपचारिक क्षेत्र में अंतर
औपचारिक क्षेत्र वह होता है जहाँ सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जाता है। इस क्षेत्र में निश्चित वेतन, कार्य के घंटे और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध होती है। इसके विपरीत अनौपचारिक क्षेत्र में कोई निश्चित नियम नहीं होते। यहाँ रोजगार अस्थायी होता है और श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्राप्त नहीं होती। भारत में बड़ी संख्या में लोग अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं।


