Class 10 History Chapter 2 – भारत में राष्ट्रवाद (Notes, Question Answer, PDF)
भारत में राष्ट्रवाद Class 10 History Chapter 2 Question Answer (UP Board)
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कक्षा 10 इतिहास: भारत में राष्ट्रवाद (Nationalism in India) - संपूर्ण NCERT समाधान, अतिरिक्त व अथवा प्रश्न
इस पोस्ट में कक्षा 10वीं के इतिहास के अध्याय 'भारत में राष्ट्रवाद' (Nationalism in India) के सभी NCERT अभ्यास प्रश्न, चर्चा करने वाले प्रश्न, गतिविधियों के उत्तर और परीक्षा में पूछे जाने वाले सभी 'अथवा' (OR) वाले प्रश्नों को विस्तार से कवर किया गया है। यह गाइड आपके बोर्ड एग्जाम्स के लिए एक परफेक्ट SEO-optimized नोट्स सामग्री है।
एन.सी.ई.आर.टी. अभ्यास प्रश्न (संक्षेप में लिखें)
प्रश्न 1. व्याख्या करें-
(क) उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई क्यों थी?
- उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन ने सभी जाति, वर्ग और संप्रदायों के लोगों को विदेशी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष के लिए एकजुट किया।
- इसने स्थानीय लोगों में राष्ट्रवादी और उदारवादी विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक अच्छा प्लेटफॉर्म प्रदान किया।
- इस प्रकार, उपनिवेश विरोधी आंदोलन सभी उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के विकास के लिए प्रजनन भूमि बना।
(ख) पहले विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया?
- प्रथम विश्व युद्ध के समय, भारत में बढ़ते मूल्यों ने जन-सामान्य के सामने कठिन स्थिति खड़ी कर दी थी।
- ग्रामीणों को फौज में भर्ती होने के लिए बाध्य किया गया और उनसे बेगार करवाई गई।
- इससे भारतीयों में व्यापक रूप से रोष फैल गया।
- साथ ही फसलों की बर्बादी ने भारतीयों में ब्रिटिश विरोधी और राष्ट्रवादी भावनाओं को फैला दिया।
(ग) भारत के लोग रॉलेट एक्ट के विरोध में क्यों थे?
ब्रिटिश विरोधी भावनाओं को रोकने के क्रम में, रॉलेट एक्ट के तहत भारतीय नेताओं को दो साल तक बिना मुकदमा चलाए जेल में बंद रखा जा सकता था। इससे भारत के लोग रॉलेट एक्ट के विरोध में थे।
(घ) गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला क्यों लिया?
गोरखपुर के चौरी-चौरा में हुई हिंसक घटना के कारण 1922 में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला किया।
प्रश्न 2. सत्याग्रह के विचार का क्या मतलब है?
अथवा "सत्याग्रह सक्रिय प्रतिरोध की एक प्रक्रिया है।" उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए। (2018, DoEe)
अथवा सत्याग्रह के विचारों की व्याख्या कीजिए। (CBSE, 2011, SA-2, 22/A1)
उत्तर:
- सत्याग्रह का विचार सत्य की ताकत तथा सत्य की खोज जैसे आदर्शों पर बल देता है।
- इस विचार के अनुसार यदि आपका उद्देश्य सच्चा है, यदि आपका संघर्ष अन्याय के खिलाफ है तो उत्पीड़क से मुकाबला करने के लिए आपको किसी शारीरिक बल की आवश्यकता नहीं है।
- प्रतिशोध की भावना या आक्रामकता का सहारा लिए बिना सत्याग्रही केवल अहिंसा के सहारे भी अपने संघर्ष में सफल हो सकता है।
- इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्पीड़क शत्रु को हिंसा के जरिये सत्य को स्वीकार करने पर विवश करने की बजाय सच्चाई को देखने और सहज भाव से स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
प्रश्न 3. निम्नलिखित पर अख़बार के लिए रिपोर्ट लिखें-
(क) जलियाँवाला बाग हत्याकांड
- 13 अप्रैल, 1919 को दूर-दराज के गाँवों के लोग जलियाँवाला बाग में एकत्रित हुए। वे अमृतसर में आयोजित होने वाले मेले में भाग लेने आए थे।
- उन्हें अमृतसर में लागू मार्शल लॉ की जानकारी नहीं थी।
- जनरल डायर वहाँ आया तथा बाहर निकलने वाले सभी दरवाजों को बंद करवा दिया। फिर, उसने निहत्थे लोगों पर गोलियाँ बरसाईं। इस घटना में सैकड़ों की संख्या में निर्दोष लोग मारे गए।
- जैसे ही यह खबर फैली, हर जगह हड़तालें होने लगीं। पुलिस के साथ लोगों की झड़पें हुईं।
- सरकार ने इसका जवाब लोगों को कई तरह से अपमानित करने वाली कठोर दमनकारी कार्रवाई के रूप में दिया। इसका परिणाम गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन की शुरुआत के रूप में सामने आया।
(ख) साइमन कमीशन
- सर जॉन साइमन ब्रिटेन में गोरी सरकार द्वारा बनाये गये संवैधानिक आयोग का प्रमुख था।
- इस आयोग को भारत में संवैधानिक तंत्र के कार्य के तौर-तरीकों को देखकर उसमें बदलाव की सिफारिश करना था। (i) साइमन कमीशन का भारतीय संवैधानिक तंत्र की जाँच परख के बाद आवश्यक परिवर्तन हेतु सुझाव देना था। किंतु इस कमीशन में कोई भारतीय सदस्य नहीं था। इसके सभी सदस्य अंग्रेज थे। अतः इस कमीशन का भारत में विरोध किया गया। (ii) जब 1928 में साइमन कमीशन भारत पहुँचा तो 'साइमन वापस जाओ' के नारे के साथ इसका स्वागत किया गया। कांग्रेस, मुस्लिम लीग तथा अन्य दूसरे राजनीतिक दलों ने साइमन कमीशन का विरोध किया।
- (i) उन भारतीय नेताओं को जो साइमन कमीशन का विरोध कर रहे थे, को खुश करने के लिए वायसराय लॉर्ड इरविन ने भारत को एक 'डोमिनियन स्टेटस' प्रदान करने के अस्पष्ट प्रस्ताव की घोषणा की। (ii) एक भावी संविधान पर चर्चा करने के लिए एक गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया।
प्रश्न 4. इस अध्याय में दी गई भारत माता की छवि और अध्याय 1 में दी गई जर्मेनिया की छवि की तुलना कीजिए।
उत्तर:
- जर्मेनिया की छवि जर्मन राष्ट्र की प्रतीक थी, जबकि भारत माता की छवि भारत राष्ट्र की छवि थी।
- दोनों ही छवियों ने राष्ट्रवादियों को प्रेरित किया, जिन्होंने अपने-अपने देशों को एक करने और उदारवादी राष्ट्र का उद्देश्य प्राप्त करने के लिए कार्य किया।
- लेकिन भारत माता की छवि जर्मेनिया से इस अर्थ में भिन्न है कि भारत माता की छवि के निर्माण में धार्मिक तत्त्वों को आधार बनाया गया है।
- भारत माता एक हिंदू देवी के रूप में त्रिशूल (हथियार) और ध्वज लिए खड़ी हैं। यह धार्मिक गुण एक राष्ट्र की अवधारणा को प्रकट करता है जिसमें हिंदुओं को अपने दूसरी जाति और धर्मों जैसे मुसलमान, ईसाई आदि भाइयों के साथ हिल-मिलकर रहने को कहा गया है।
अतः, भारत माता की छवि विवादास्पद बन गई और आजादी के पूर्व भारत में अप्रत्यक्ष रूप से सांप्रदायिकता को फैलाने का कारण बनी। इसके विपरीत जर्मेनिया की छवि ने ऐसे किसी विवाद को जन्म नहीं दिया।
चर्चा करें (विस्तृत प्रश्नोत्तर)
प्रश्न 1. 1921 में असहयोग आंदोलन में शामिल होने वाले सभी सामाजिक समूहों की सूची बनाइए। इसके बाद उनमें से किन्हीं तीन को चुन कर उनकी आशाओं और संघर्षों के बारे में लिखते हुए यह दर्शाइए कि वे आंदोलन में शामिल क्यों हुए?
उत्तर- 1921 में असहयोग आंदोलन में शामिल होने वाले सामाजिक समूह निम्नलिखित थे :
- मध्य वर्गों के लोग (विद्यार्थी, हेडमास्टर, शिक्षक, वकील आदि)
- मद्रास की गैर-ब्राह्मण पार्टी 'जस्टिस पार्टी' को छोड़कर अन्य राजनीतिक दल।
- व्यापारी और व्यवसायी।
- बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में अवध के किसान।
- अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश के आदिवासी।
- असम के बागान मज़दूर।
(क) अवध के किसान - (i) बाबा रामचंद्र अवध में किसानों के नेता थे। वे एक संन्यासी थे जो पहले गिरमिटिया मज़दूर के तौर पर फिजी भी जा चुके थे। उन्होंने अवध के ताल्लुकदारों (जमींदारों) के खिलाफ एक आंदोलन की शुरुआत की। (ii) अवध के किसानों की समस्याएँ निम्नलिखित थीं- अवध के ताल्लुकदारों तथा जमींदारों द्वारा किसानों से अधिक लगान तथा कई अन्य प्रकार के करों की माँग की जा रही थी। किसानों को जमींदारों के खेतों पर बेगार अर्थात् बिना मज़दूरी के काम करना पड़ता था। एक पट्टेदार के रूप में किसानों के पट्टे निश्चित नहीं थे। उन्हें लगातार ज़मीन से बेदखल किया जाता रहता था ताकि ज़मीन पर उनका कोई अधिकार स्थापित न हो सके।
(ख) आंध्र प्रदेश के आदिवासी - (i) सरकार ने उनके जंगल में प्रवेश पर रोक लगा दी। उन्हें पशुओं को चराने, जलावन की लकड़ियाँ इकट्ठी करने आदि से रोक दिया, जिन्हें वे अपना परंपरागत अधिकार मानते थे। आदिवासियों द्वारा सरकार के इस कदम का तीव्र विरोध किया गया। (ii) सरकार चाहती थी कि ये आदिवासी लोग उस क्षेत्र में चलने वाले सड़क निर्माण कार्य तथा अन्य सरकारी कार्यों में बेगार करें। ऐसा करने के लिए आदिवासी किसान तैयार नहीं थे और उन्होंने विद्रोह कर दिया। (iii) इसी दौरान अल्लूरी सीताराम राजू एक ताकतवर आदिवासी नेता के रूप में उभरा तथा उसने गांधीजी में अपना विश्वास व्यक्त किया। उसने सरकार के विरुद्ध छापामार युद्ध पर बल दिया तथा 1920 के दशक में ऐसी गतिविधियों भी उसने शुरू कर दीं। (iv) गुडेम विद्रोहियों ने पुलिस थानों पर धावा बोला तथा अंग्रेज अधिकारियों को मारने के प्रयास किए। (v) उसने गुरिल्ला युद्ध तकनीक तो अपनाई, किंतु 1924 में उनका नेता अल्लूरी सीताराम राजू पकड़ा गया तथा उसे फांसी की सजा दे दी गई।
(ग) बागान मज़दूर - (i) स्वराज की अवधारणा के बारे में मज़दूरों की अपनी समझ थी। असम के बागानी मज़दूरों के लिए आज़ादी का मतलब यह था कि वे उन चारदीवारियों से जब चाहें आ-जा सकते हैं, जिनमें उनको बंद करके रखा गया था। उनके लिए आज़ादी का मतलब था कि वे अपने गाँवों से संपर्क रख पाएँगे। (ii) जब उन्होंने असहयोग आंदोलन के बारे में सुना तो हज़ारों मज़दूर अपने अधिकारियों की अवहेलना करने लगे। उन्होंने बागान छोड़ दिए और अपने घर को चल दिए। (iii) उनको लगता था कि अब गांधी राज आ रहा है इसलिए अब तो हर एक को गाँव में ज़मीन मिल जाएगी। (iv) लेकिन वे अपनी मंजिल पर नहीं पहुँच पाए। रेलवे और स्टीमरों की हड़ताल के कारण वे रास्ते में ही फँसे रह गए। उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया और उनकी बुरी तरह पिटाई की गई।
प्रश्न 2. नमक यात्रा की चर्चा करते हुए स्पष्ट करें कि यह उपनिवेशवाद के खिलाफ प्रतिरोध का एक असरदार प्रतीक था।
अथवा 'नमक यात्रा' उपनिवेशवाद के विरुद्ध विरोध का प्रभावी प्रतीक क्यों मानी गई? व्याख्या कीजिए। (2018-CBSE-Comptt)
अथवा नमक यात्रा औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ किस प्रकार प्रभावकारी प्रतिरोध का संकेत थी? किन्हीं तीन तथ्यों की व्याख्या कीजिए। (CBSE, 2011, SA-2, 23/B1)
अथवा उपनिवेशवाद के विरुद्ध 'नमक यात्रा की सफलता' का एक प्रभावशाली प्रतीक के रूप में मूल्यांकन कीजिए। (CBSE, 2011, SA-2, 36/A1)
उत्तर- निम्नलिखित परिस्थितियों में गांधीजी को नमक कर की समाप्ति को सविनय अवज्ञा आंदोलन के एक महत्त्वपूर्ण माँग के रूप में अपनाना पड़ा।
- महात्मा गांधी ने नमक को देश को एक सूत्र में बाँधने के लिए एक सक्षम प्रतीक के रूप में देखा।
- 31 जनवरी 1930 को उसने वायसराय इरविन को एक 11-सूत्री माँगपत्र भेजा। इसमें सरकार को सर्वाधिक झकझोरने वाली माँग थी नमक-कर को समाप्त करना।
- नमक एक ऐसी चीज़ थी जिसका उपभोग अमीर तथा गरीब सभी के द्वारा समान रूप से किया जाता था। यह भारतीय भोजन का अपरिहार्य घटक था। नमक के ऊपर कर तथा इसके उत्पादन पर सरकार का एकाधिकार ऐसी चीजें थीं जो ब्रिटिश सरकार के दमनकारी चेहरे को दिखलाती थीं।
- गांधीजी की माँगों को पूरा नहीं किया गया। अतः, गुजरात में साबरमती स्थित अपने आश्रम से सिर्फ चुने हुए 78 स्वयं सेवकों के साथ उन्होंने अपनी प्रसिद्ध नमक यात्रा की शुरुआत की।
- 6 अप्रैल, 1930 को वे दांडी पहुँचे जहाँ उन्होंने समुद्री खारे पानी को उबालकर नमक बनाया तथा इस तरह नमक कानून का उल्लंघन किया।
प्रश्न 3. कल्पना कीजिए कि आप सिविल नाफरमानी आंदोलन में हिस्सा लेने वाली महिला हैं। बताइए कि इस अनुभव का आपके जीवन में क्या अर्थ होता?
उत्तर-
- मैं बहुत विनीत और महानता का अनुभव कर रही हूँ। जब मैं हज़ारों एक जैसे मानस वाली महिलाओं के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत यात्रा करूँगी तो मेरे मन में, मेरे प्रिय देश के लिए कुछ करने की भावना जागृत होगी।
- यद्यपि इतनी बड़ी भीड़ के साथ शहर की सड़कों से गुज़रने का मेरा यह अनुभव बहुत असाधारण होगा क्योंकि जीवन में इससे पहले मुझे ऐसे अनुभव का मौका नहीं मिला।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने से भारतीय समाज में औरतों का स्तर भी ऊँचा उठेगा।
- इससे उन्हें भारतीय पुरुषों के साथ समान महत्त्व मिलेगा।
- यद्यपि इससे औरतों के घरेलू जीवन में अधिक परिवर्तन नहीं होगा, लेकिन फिर भी आंदोलन में भागीदारी, भारतीय औरतों के लिए एक सबसे महत्त्वपूर्ण क्षण होगा।
प्रश्न 4. राजनीतिक नेता पृथक निर्वाचिका के सवाल पर क्यों बँटे हुए थे?
उत्तर-
- राजनीतिक नेता भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते थे।
- जैसे, डॉ. अंबेडकर 'दमित वर्गों' या दलितों का नेतृत्व करते थे। इसी प्रकार मोहम्मद अली जिन्ना भारत के मुस्लिम सामाजिक समूह का प्रतिनिधित्व करते थे।
- ये नेतागण विशेष राजनीतिक अधिकारों और पृथक् निर्वाचन क्षेत्र माँगकर अपने अनुयायियों का जीवन-स्तर ऊँचा उठाना चाहते थे।
- लेकिन कांग्रेस पार्टी, विशेषकर गांधीजी, का मानना था कि पृथक निर्वाचन क्षेत्र भारत की एकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।
- वे इस माँग के विरुद्ध थे और एक समय इसके लिए आमरण अनशन पर भी बैठे थे। यही वे कारण थे कि राजनीतिक नेता पृथक चुनाव क्षेत्रों के सवाल पर बँटे हुए थे।
प्रश्न- सविनय अवज्ञा आंदोलन में विभिन्न वर्गों और समूहों ने क्यों हिस्सा लिया?
अथवा सविनय अवज्ञा आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूहों के योगदानों को स्पष्ट कीजिए। (CBSE, 2011, SA-2, 12/B1)
उत्तर- विभिन्न सामाजिक समूहों का सविनय अवज्ञा आंदोलन में योगदान निम्नलिखित हैं-
- अमीर किसान: व्यापारिक फसलों के उत्पादक होने के नाते व्यापार में मंदी तथा गिरती हुई कीमतों से वे सर्वाधिक प्रभावित हुए। चूँकि सरकार ने उनकी राजस्व को कम करने की माँग को ठुकरा दिया, अतः उन्होंने बड़ी संख्या में बहिष्कार कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उनकी नजर में स्वराज के लिए संघर्ष दरअसल उच्च राजस्व के खिलाफ़ संघर्ष था।
- महिलाएँ: महिलाओं ने विरोध रैलियों में हिस्सा लिया, नमक बनाया तथा विदेशी कपड़ों तथा शराब की दुकानों पर धरने दिये। उन्होंने राष्ट्र सेवा को अपना एक पवित्र कर्तव्य माना।
- व्यापारी वर्ग: बड़ी संख्या में व्यापारियों तथा उद्योगपतियों ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने उन औपनिवेशिक नीतियों के विरुद्ध प्रतिक्रिया व्यक्त की जो उनके व्यापारिक गतिविधियों में अवरोध पैदा करते थे। वे विदेशी वस्तुओं की आयात से सुरक्षा पाना चाहते थे।
- औद्योगिक मज़दूर वर्ग: औद्योगिक मज़दूर वर्ग ने नागपुर को छोड़कर अन्यत्र कहीं भी अधिक संख्या में सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग नहीं लिया। उन्होंने गांधीजी के केवल कुछ कार्यक्रमों को अपना समर्थन दिया। जैसे कि, उन्होंने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का समर्थन किया क्योंकि, यह उनके कम वेतन तथा कार्य करने की खराब परिस्थितियों के विरोध में किए गए आंदोलन से जुड़ा हुआ था।
प्रश्न- स्रोत-घ को ध्यान से पढ़ें। क्या आप सांप्रदायिकता के बारे में इक़बाल के विचारों से सहमत हैं? क्या आप सांप्रदायिकता को अलग प्रकार से परिभाषित कर सकते हैं? (पृष्ठ संख्या 45)
उत्तर- (i) नहीं, मैं सांप्रदायिकता के बारे में इक़बाल के विचारों से सहमत नहीं हूँ क्योंकि, वह इस विचारधारा पर आधारित था कि भारत एक विविधतापूर्ण जातीय और धार्मिक भूमि है। (ii) इसका यह अर्थ कदापि नहीं होता कि भारत में संप्रदाय आधारित किसी प्रकार की सांप्रदायिक व्यवस्था या बँटवारे की ज़रूरत है। (iii) मेरे विचार के अनुसार, संप्रदायवाद को स्थानीय समुदाय ही नियंत्रित करते हैं। इसमें राष्ट्र जैसा कोई तत्त्व समाहित नहीं होता जो कि भारतीय स्वतंत्रता में राष्ट्रवादियों के संघर्ष का प्रेरणा स्रोत बना था।
गतिविधि तथा पाठगत प्रश्न
गतिविधि (पृष्ठ संख्या 31)
प्रश्न- स्रोत-क को ध्यान से पढ़ें। जब महात्मा गांधी ने सत्याग्रह को सक्रिय प्रतिरोध कहा तो इससे उनका क्या आशय था?
उत्तर- (1) सत्याग्रह अपने शत्रु को कष्ट नहीं पहुँचाता है। यह तो शुद्ध आत्मबल है। सत्य ही आत्मा का आधार होता है, अतः यह सत्याग्रह का भी आधार होता है। (2) इसका अर्थ विध्वंस कतई नहीं है, बल्कि इसका अर्थ है, शत्रु के मस्तिष्क को प्रेम, करुणा और सत्य के द्वारा विध्वंसक विचारों से हटाकर उसमें रचनात्मक विचारों को आरोपित करना। अतः, सत्याग्रह 'सक्रिय प्रतिरोध' है।
गतिविधि (पृष्ठ संख्या 35)
प्रश्न- अगर आप 1920 में उत्तर प्रदेश में किसान होते तो स्वराज के लिए गांधीजी के आह्वान पर क्या प्रतिक्रिया देते? अपने उत्तर के साथ कारण भी बताइए।
उत्तर- मैं गांधीजी के स्वराज के आह्वान पर सकारात्मक अहिंसात्मक आंदोलनों में भाग लेता। स्वराज प्राप्ति का उनका सत्य और अहिंसा का तरीका सबसे कारगर था, अतएव मैं उनका अनुसरण करता।
गतिविधि (पृष्ठ संख्या 48)
प्रश्न- पाठ्यपुस्तक के चित्र 12 और 14 को देखिए। क्या आपको लगता है कि ये सभी जातियों और समुदायों को भाएँगी? अपनी राय को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- (i) नहीं, मुझे नहीं लगता कि ये तसवीरें भारत की सभी जातियों और समुदायों को भाएँगी। (ii) क्योंकि भारत माता की ये छवियाँ भारत माता को हिंदू देवी के रूप में दर्शा रही हैं। (iii) ये छवियाँ धार्मिक पक्षपात प्रदर्शित कर रही हैं; जबकि इन्हें धार्मिक रूप देने से दूर रहना चाहिए था। छवियों में सभी जातियों और संप्रदायों के लिए एकता के राष्ट्रवादी विचार परिलक्षित होने चाहिए।
(क) उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई क्यों थी?
(ख) पहले विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया?
(ग) भारत के लोग रॉलेट एक्ट के विरोध में क्यों थे?
(घ) गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला क्यों लिया?
(2) इसने राष्ट्रवादी विचारों के आदान-प्रदान के लिए मंच प्रदान किया।
(3) इस प्रकार यह राष्ट्रवाद के विकास का आधार बना।
(2) लोगों को सेना में भर्ती किया गया।
(3) महामारी फैली।
(4) इससे राष्ट्रवाद को बढ़ावा मिला।
गतिविधि (पृष्ठ 48)
(ii) भारत माता को हिंदू देवी के रूप में दिखाया गया है।
(iii) इससे धार्मिक पक्षपात दिखता है।
चर्चा करें
(2) महिलाएँ – आंदोलन में भाग लिया।
(3) व्यापारी – विदेशी वस्तुओं का विरोध।
(4) मजदूर – खराब परिस्थितियों के खिलाफ।
महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
(2) यह अन्याय के खिलाफ संघर्ष है।
(3) इसमें हिंसा का प्रयोग नहीं होता।
Top FAQs
19वीं सदी में राष्ट्रवाद का विकास हुआ।
एक ऐसा कानून जिसमें बिना मुकदमे गिरफ्तारी की अनुमति थी।
चौरी-चौरा घटना के कारण।

