Hello Students! With exams just around the corner, we know how overwhelming it can be to revise the entire syllabus in a short amount of time. To make your preparation easier and more effective, we have compiled a list of the 10 most important questions and answers in Social Science. These topics are frequently asked in board exams and competitive tests. Our goal is to provide you with concise, point-wise answers that are easy to memorize and will help you score better. What’s Covered in This Post? History: The Quit India Movement, the Indian Independence Act 1947, and the Foundation of Congress. Civics: The Powers of the Supreme Court and Non-Alignment Policy. Geography & Economy: Iron & Steel Industry, Population Growth, and Challenges in Indian Agriculture. Social Reform: The contribution of Raja Rammohan Roy. Whether you are looking for a last-minute revision or a solid foundation for these topics, these notes are designed to be your perfect study companion. Let’s dive into the questions!
Top 10 Most Important Questions & Answers for Social Science Exams
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1. भारत छोड़ो आन्दोलन (1942) के कारणों और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर इसके प्रभाव की विस्तृत विवेचना कीजिए।
भारत छोड़ो आन्दोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम और निर्णायक चरण था। यह आन्दोलन 8 अगस्त 1942 को बम्बई के गोवालिया टैंक मैदान में महात्मा गांधी के नेतृत्व में प्रारम्भ हुआ। गांधीजी ने “करो या मरो” का नारा देकर देशवासियों को अंग्रेजी शासन के विरुद्ध अंतिम संघर्ष के लिए प्रेरित किया।
इस आन्दोलन के प्रमुख कारणों में द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को बिना परामर्श के शामिल करना, क्रिप्स मिशन की असफलता और अंग्रेजों की दमनकारी नीतियाँ थीं। ब्रिटिश सरकार भारत को वास्तविक स्वतंत्रता देने के लिए तैयार नहीं थी। युद्ध के कारण देश में आर्थिक संकट, महँगाई और बेरोजगारी बढ़ गई थी। जनता में असंतोष चरम पर था।
आन्दोलन शुरू होते ही अंग्रेजों ने गांधीजी और अन्य प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसके बावजूद आन्दोलन स्वतःस्फूर्त रूप से पूरे देश में फैल गया। रेल मार्गों को बाधित किया गया, सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार किया गया और कई स्थानों पर समानांतर सरकारें स्थापित की गईं। यद्यपि अंग्रेजों ने कठोर दमन किया, परन्तु जनता का उत्साह कम नहीं हुआ।
इस आन्दोलन का सबसे बड़ा प्रभाव यह हुआ कि अंग्रेज सरकार को यह स्पष्ट हो गया कि भारत पर अधिक समय तक शासन करना संभव नहीं है। इसने स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक दिशा दी और 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया।
अतः भारत छोड़ो आन्दोलन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष का ऐतिहासिक और प्रेरणादायक अध्याय है।
2. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 की प्रमुख धाराओं और विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 ब्रिटिश संसद द्वारा पारित एक ऐतिहासिक अधिनियम था, जिसके माध्यम से भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई। यह अधिनियम 15 अगस्त 1947 से प्रभावी हुआ।
इस अधिनियम के अनुसार भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्र बनाए गए। ब्रिटिश शासन पूर्णतः समाप्त कर दिया गया। गवर्नर जनरल की नियुक्ति का प्रावधान किया गया जो प्रत्येक राष्ट्र में ब्रिटिश सम्राट का प्रतिनिधित्व करता था। संविधान सभा को नया संविधान बनाने का अधिकार दिया गया।
ब्रिटिश संसद का भारत पर कोई अधिकार नहीं रहा। देशी रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र रहने का विकल्प दिया गया। इस अधिनियम ने भारतीय जनता को आत्मनिर्णय का अधिकार प्रदान किया।
यह अधिनियम भारतीय स्वतंत्रता की आधारशिला सिद्ध हुआ और भारत के लोकतांत्रिक संविधान निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।
3. सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के संगठन, शक्तियों और क्षेत्राधिकार पर विस्तृत निबन्ध लिखिए।
सर्वोच्च न्यायालय भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है। इसका गठन संविधान के अनुच्छेद 124 के अंतर्गत किया गया। इसमें एक मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
सर्वोच्च न्यायालय को तीन प्रकार के क्षेत्राधिकार प्राप्त हैं — मूल, अपीलीय और परामर्श क्षेत्राधिकार। मूल क्षेत्राधिकार के अंतर्गत केंद्र और राज्य के बीच विवादों का निपटारा किया जाता है। अपीलीय क्षेत्राधिकार के अंतर्गत उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपील की जाती है। परामर्श क्षेत्राधिकार के अंतर्गत राष्ट्रपति किसी महत्वपूर्ण प्रश्न पर सलाह मांग सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय को न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति भी प्राप्त है। यह संविधान का संरक्षक है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है।
अतः सर्वोच्च न्यायालय भारतीय लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है।
4. भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारणों की समीक्षा कीजिए तथा इसके नियंत्रण हेतु प्रभावी उपाय सुझाइए।
भारत में जनसंख्या वृद्धि एक गंभीर समस्या है। इसके प्रमुख कारणों में अशिक्षा, गरीबी, बाल विवाह, सामाजिक परम्पराएँ तथा चिकित्सा सुविधाओं का विकास शामिल हैं। मृत्यु दर में कमी आई है, परन्तु जन्म दर अधिक बनी हुई है।
जनसंख्या वृद्धि के दुष्प्रभावों में बेरोजगारी, संसाधनों पर दबाव, गरीबी और पर्यावरण प्रदूषण शामिल हैं।
नियंत्रण के उपायों में शिक्षा का प्रसार, परिवार नियोजन कार्यक्रम, महिला सशक्तिकरण, विवाह की आयु में वृद्धि और जनजागरूकता अभियान आवश्यक हैं। सरकार द्वारा “छोटा परिवार, सुखी परिवार” जैसे कार्यक्रम चलाए गए हैं।
अतः जनसंख्या नियंत्रण राष्ट्रीय विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
5. लौह-इस्पात उद्योग का महत्व बताते हुए भारत में इसके प्रमुख केंद्रों और कच्चे माल की उपलब्धता का वर्णन कीजिए।
लौह-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग कहा जाता है क्योंकि यह अन्य उद्योगों के विकास का आधार है। रेल, भवन निर्माण, मशीनरी और रक्षा उद्योग इसी पर निर्भर हैं।
भारत में इसके प्रमुख केंद्र भिलाई, बोकारो, राउरकेला और दुर्गापुर हैं। कच्चा माल जैसे लौह अयस्क झारखंड और ओडिशा से प्राप्त होता है। कोयला झरिया और रानीगंज क्षेत्रों से मिलता है।
इस उद्योग ने भारत की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया है।
7. भारतीय कृषि के पिछड़ेपन के मुख्य कारणों की विवेचना कीजिए तथा कृषि सुधार हेतु सुझाव दीजिए।
भारतीय कृषि देश की अर्थव्यवस्था का आधार है, फिर भी यह कई समस्याओं से ग्रस्त है। कृषि के पिछड़ेपन के प्रमुख कारणों में छोटे और बिखरे जोत, पारंपरिक तकनीकों का उपयोग, सिंचाई सुविधाओं की कमी, उन्नत बीजों और उर्वरकों का अभाव तथा किसानों की आर्थिक कमजोरी शामिल हैं।
अधिकांश किसान आधुनिक मशीनरी खरीदने में सक्षम नहीं हैं। मानसून पर निर्भरता के कारण उत्पादन में अनिश्चितता रहती है। विपणन सुविधाओं की कमी और बिचौलियों की भूमिका भी किसानों को नुकसान पहुँचाती है।
कृषि सुधार हेतु आवश्यक है कि किसानों को सस्ती ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाए, आधुनिक उपकरणों का उपयोग बढ़ाया जाए, सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार किया जाए तथा कृषि शिक्षा और अनुसंधान को प्रोत्साहन दिया जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का प्रभावी क्रियान्वयन भी आवश्यक है।
यदि इन सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो भारतीय कृषि अधिक उत्पादक और लाभकारी बन सकती है।
8. अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब, कहाँ और किसके द्वारा हुई? इसके मुख्य उद्देश्य क्या थे?
अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसम्बर 1885 को बम्बई (वर्तमान मुंबई) में ए.ओ. ह्यूम द्वारा की गई। इसके प्रथम अध्यक्ष डब्ल्यू.सी. बनर्जी थे। प्रारम्भ में इसका उद्देश्य भारतीयों को एक राजनीतिक मंच प्रदान करना था।
कांग्रेस के मुख्य उद्देश्यों में भारतीयों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना, प्रशासन में सुधार लाना, नागरिक अधिकारों की रक्षा करना और ब्रिटिश सरकार के समक्ष भारतीयों की समस्याएँ रखना शामिल था।
समय के साथ कांग्रेस एक राष्ट्रीय आन्दोलन का केंद्र बन गई और इसने स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। नरम दल और गरम दल के नेताओं ने अलग-अलग चरणों में संघर्ष को आगे बढ़ाया।
अतः कांग्रेस की स्थापना भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत का महत्वपूर्ण चरण थी।
9. राजा राममोहन राय को "आधुनिक भारत का जनक" क्यों कहा जाता है? उनके सामाजिक और धार्मिक सुधारों का वर्णन कीजिए।
राजा राममोहन राय को आधुनिक भारत का जनक इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने सामाजिक और धार्मिक सुधारों के माध्यम से भारतीय समाज में नवजागरण की शुरुआत की। उनका जन्म 1772 में हुआ। उन्होंने सती प्रथा का कठोर विरोध किया और इसके उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य एकेश्वरवाद का प्रचार और सामाजिक कुरीतियों का विरोध करना था। उन्होंने स्त्री शिक्षा का समर्थन किया और विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहित किया।
उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता और आधुनिक शिक्षा का समर्थन किया। अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण था।
उनके सुधारों ने भारतीय समाज को आधुनिक दिशा दी और राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया।
10. विश्व शान्ति के लिए गुट-निरपेक्षता (Non-Alignment) की प्रासंगिकता और महत्व को समझाइए।
गुट-निरपेक्षता एक ऐसी विदेश नीति है जिसके अंतर्गत कोई देश किसी भी शक्ति गुट का सदस्य नहीं बनता। शीत युद्ध के समय विश्व दो गुटों में विभाजित था – अमेरिका और सोवियत संघ। भारत ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में गुट-निरपेक्ष नीति अपनाई।
इस नीति का उद्देश्य विश्व शांति बनाए रखना, स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करना तथा उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का विरोध करना था। भारत ने पंचशील सिद्धांतों को भी अपनाया, जो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर आधारित थे।
गुट-निरपेक्षता ने विकासशील देशों को स्वतंत्र निर्णय लेने का अवसर दिया और विश्व राजनीति में संतुलन स्थापित किया।
अतः यह नीति आज भी विश्व शांति और सहयोग के लिए प्रासंगिक है।


